नागरकोटक ओ भोर आ हमर प्रेमक शुरुआत
नागरकोटक ओ भोर आजुओ हमर स्मृतिमे जियैत अछि।
सूर्यक पहिल किरण खिड़की सँ भीतर आबि रहल छल। पहाड़क हावा शान्त छल। आ ओ हमर बगलमे सूतल छल। चारि महीनाक दूरी, इंतजार आ अधैर्यक बाद हम फेर एक संग छलहुँ।
हम चुपचाप ओकर चेहराक दिस देखैत रहलहुँ। ओकर माथ पर खसल केश, ओकर शान्त साँस, आ ओकर ओ मासूम मुस्की जे निद्रामे सेहो रहैत छल। हम सोचए लगलहुँ—ई कहानी आखिर शुरू कोना भेल छल?
हमर पहिल भेंट कोनो फिल्मी दृश्य नहि छल।
नहि कोनो गुलाब छल, नहि कोनो प्रेम प्रस्ताव।
ई त बस एकटा साधारण दिन छल।
हम मेडिकल कलेजक एक कार्यक्रममे गेल छलहुँ। भीड़ बहुत छल। सभ अपन-अपन मित्रसभक संग व्यस्त छल। हमहूँ किछु मित्रसभक संग गप्पमे लागल छलहुँ।
तखने हमर नजरि ओकरा पर पड़ल।
ओ दूर ठाढ़ छल।
सफेद कुर्तामे।
हँसैत।
ओहि क्षणमे शायद ओ हमरा नहि देखलक, मुदा हम ओकरा देखलहुँ।
आ कनी काल लेल हमरा सभक आसपासक सभ आवाज गायब भऽ गेल।
मुदा हम तखन एकरा प्रेम नहि कहलहुँ।
हम अपनाकेँ बुझेलहुँ—”बस सुन्दर लड़की अछि।”
मुदा मन मानए लेल तैयार नहि छल।
कार्यक्रम समाप्त भऽ गेल।
हम सभ अपन-अपन बाट पकड़ि लेलहुँ।
मुदा रातिमे जखन फोन हाथमे लेलहुँ तऽ अनायासे ओकर प्रोफाइल फेर खोलि देखने रहलहुँ।
आ ई सिलसिला बहुत दिन धरि चलैत रहल।
धीरे-धीरे गप्प शुरू भेल।
पहिने सामान्य।
“खाना खाइ लेलहुँ?”
“पढ़ाई कोना चलि रहल अछि?”
“आइ ड्युटी कतेक बजे समाप्त भेल?”
मुदा किछु सप्ताहक बाद ई संदेश प्रतीक्षा बनि गेल।
भोरमे उठिते ओकर संदेश देखबाक आदत भऽ गेल।
रातिमे सुतए सँ पहिने ओकर आवाज सुनबाक आदत भऽ गेल।
एक दिन अचानक ओ पूछलक—
“हम नहि रहब तऽ याद करब?”
हम हँसैत कहलहुँ—
“नहि।”
ओ कहलक—
“झूठ।”
हम कहने रहलहुँ—
“हाँ, बहुत याद करब।”
फोनक दोसर छोरपर किछु क्षण चुप्पी रहल।
आ शायद ओहि चुप्पीमे प्रेम जन्म लेने छल।
समय बीतैत गेल।
हम सभ एक-दोसराक जीवनक हिस्सा बनैत गेलहुँ।
हमरा ओकर हर आदत याद रहए लागल।
ओ चिया पीबैत समय कप कोना पकड़ैत अछि।
ओ नाराज होइत काल चुप कियैक भऽ जाइत अछि।
ओ खुशीमे कतेक तेज हँसैत अछि।
आ ओ रातिमे सुतबाक पहिने कतेक बेर “Good Night” कहैत अछि।
प्रेम धीरे-धीरे बढ़ैत गेल।
मुदा जीवन सदा सरल नहि होइत अछि।
कैरियर, परिवार, जिम्मेदारी आ परिस्थितिसभक बीच कहियो-कहियो दूरी आबि जाइत अछि।
हमर जीवनमे सेहो एहन समय आयल।
आ फेर आयल ओ चारि महीना।
चारि महीना जे चारि वर्ष जेकाँ लगैत छल।
हम दुनू बात करैत छलहुँ, मुदा स्पर्श नहि छल।
वीडियो कल छल, मुदा साथ नहि छल।
प्रेम छल, मुदा उपस्थिति नहि छल।
कतेको राति एहन गेल जतय हम फोनक स्क्रीन देखैत-देखैत सूति गेलहुँ।
कतेको भोर एहन भेल जतय आँखि खुलिते ओकर संदेश खोजए लगैत छलहुँ।
आ फेर एक दिन निर्णय भेल—
हम भेटब।
नागरकोटमे।
जखन ओ हमरा सामने आयल तऽ मन भीतर सँ शान्त भऽ गेल।
जेना कोनो हराएल वस्तु फेर भेटि गेल हो।
ओहि साँझ हम बहुत गप्प कयलहुँ।
अतीत।
भविष्य।
भय।
सपना।
विवाह।
जीवन।
सभ किछु।
आ राति जखन हम दुनू एक-दोसराक कातमे पड़ल छलहुँ, तखन बुझायल जे प्रेमक वास्तविक अर्थ की होइत अछि।
प्रेम केवल उत्साह नहि अछि।
प्रेम शान्ति अछि।
सुरक्षा अछि।
विश्वास अछि।
ककरो लग एहन महसूस करब जेना अहाँ घर पहुँचि गेल छी।
आ आब, नागरकोटक ओ भोरमे, जखन सूर्यक किरण ओकर चेहरापर पड़ि रहल छल, हम बुझि रहल छलहुँ जे हमर सभसँ सुन्दर स्मृति पहाड़ नहि अछि।
सूर्योदय नहि अछि।
ओ होटलक कमरा नहि अछि।
हमर सभसँ सुन्दर स्मृति ओ लड़की अछि जे एखन हमर बगलमे सूतल अछि।
ओ लड़की, जे एक दिन भीड़मे बस एक बेर हँसल छल।
आ अनजानेमे हमर सम्पूर्ण जीवन बदलि देने छल।






